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दोपहर समाचार

1415 HRS
29.03.2020

मुख्य समाचार

  • प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा, परस्‍पर सुरक्षित दूरी बनाये रखना ही कोविड-19 से मुकाबले का सबसे कारगर तरीका है। देशवासियों से स्‍वयं और अपने परिवार की रक्षा करने का आह्वान किया।

  • श्री मोदी ने आकाशवाणी से मन की बात कार्यक्रम में  कहा कि भारत कोविड-19 से लडाई जरूर जीतेगा।

  • प्रधानमंत्री ने कहा, कोरोना के फैलाव को रोकने के लिए कठोर कदम उठाने आवश्‍यक हैं। कोरोना वायरस के फैलाव को रोकने के लिए लोगों से मिलकर काम करने को कहा। 

  • कोविड-19 से संघर्ष में डटे विभिन्‍न लोगों से प्रधानमंत्री की नियमित बातचीत जारी।

  • ईरान से दो सौ 75 भारतीयों को लेकर एक और दल जोधपुर पहुंचा।

  • और इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन ने कहा पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस पर्याप्‍त मात्रा में उपलब्‍ध।

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प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा कि परस्‍पर सुरक्षित दूरी बनाये रखना ही कोविड-19 से मुकाबले का सबसे कारगर तरीका है। आकाशवाणी से आज मन की बात कार्यक्रम में अपने विचार साझा करते हुए श्री मोदी ने कहा कि हर किसी को अपनी और अपने परिवार की रक्षा करनी होगी। उन्‍होंने कहा कि प्रत्‍येक भारतीय का संकल्‍प और नियम का पालन इस संकट से निपटने में सहायक होगा।


प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत जैसे 130 करोड़ की आबादी वाले देश के पास कोरोना के खिलाफ लड़ाई के लिए पूर्णबंदी के अलावा और कोई रास्‍ता नहीं था।


मैं आपकी दिक्‍कतें समझता हूं। आपकी परेशानी भी समझता हूं। लेकिन भारत जैसे 130 करोड़ की आबादी वाले देश को कोरोना के खिलाफ लड़ाई के लिए ये कदम उठाये बिना कोई रास्‍ता नहीं था। कोरोना के खिलाफ लड़ाई जीवन और मृत्‍यु के बीच की लड़ाई है और इस लड़ाई में हमें जीतना है और इसीलिए ये कठोर कदम उठाने बहुत आवश्‍यक थे।  


श्री मोदी ने कहा कि दुनिया भर में आज जो कुछ भी घट रहा है उसमें यही एकमात्र विकल्‍प बचा था। उन्‍होंने कहा कि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी ही होगी। प्रधानमंत्री ने लोगों को हो रही कठिनाइयों के लिए क्षमायाचना भी की।


मैं आपकी दिक्‍कतें समझता हूं। आपकी परेशानी भी समझता हूं। लेकिन भारत जैसे 130 करोड़ की आबादी वाले देश को कोरोना के खिलाफ लड़ाई के लिए ये कदम उठाये बिना कोई रास्‍ता नहीं था। कोरोना के खिलाफ लड़ाई जीवन और मृत्‍यु के बीच की लड़ाई है और इस लड़ाई में हमें जीतना है और इसीलिए ये कठोर कदम उठाने बहुत आवश्‍यक थे। किसी का मन नहीं करता है ऐसे कदमों के लिए। लेकिन दुनिया के हालात देखने के बाद लगता है कि यही एक रास्‍ता बचा है। आपको, आपके परिवार को सुरक्षित रखना है। मैं फिर एक बार आपको जो भी असुविधा हुई है, कठिनाई हुई है। इसके लिए क्षमा मांगता हूं।  


प्रधानमंत्री ने कहा कि पूर्णबंदी के दौरान नियम तोड़ने वाले अपने जीवन से खेल रहे हैं। उन्‍होंने कहा कि लॉकडाउन का नियम तोड़ेंगे तो कोरोना वायरस से बचना मुश्किल हो जायेगा।


ये लॉकडाउन आपके खुद के बचने के लिए है। आपको अपने को बचाना है, अपने परिवार को बचाना है। अभी आपको आने वाले कई दिनों तक इसी तरह धैर्य दिखाना ही है। लक्ष्‍मण रेखा का पालन करना ही है। साथियो मैं ये भी जानता हूं कि कोई कानून नहीं तोड़ना चाहता, लेकिन कुछ लोग ऐसा कर रहे हैं, क्‍योंकि अब भी वो स्थिति की गंभीरता को नहीं समझ रहे हैं। ऐसे लोगों को यही कहूंगा कि लॉकडाउन का नियम तोड़ेंगे तो कोरोना वायरस से बचना मुश्किल हो जायेगा।   


श्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा कि कोरोना के खिलाफ लड़ाई अभूतपूर्व और चुनौतीपूर्ण है। इसलिए, हमें ऐसे कदम उठाने पड़ रहे हैं जिनके बारे में विश्‍व इतिहास में पहले कभी नहीं सुना गया।


श्री मोदी ने कहा कि हमें गरीबों के प्रति अपनी सम्‍वेदनशीलता को बढ़ाना होगा। संकट की इस घड़ी में जब भी कोई गरीब या भूखा व्‍यक्ति दिखे, तो सबसे पहले उसे खाना खिलाने का प्रयास करना चाहिए। श्री मोदी ने एक श्‍लोक की चर्चा करते हुए कहा कि बीमारी और उसके प्रकोप से शुरू में ही निपटना चाहिए।


हमारे यहां कहा गया है, एवं एव विकार: अपि तरूण: साध्‍यते सुखम्। यानी बीमारी और उसके प्रकोप से शुरूआत में ही निपटना चाहिए। बाद में रोग असाध्‍य हो जाते हैं। तब इलाज भी मुश्किल हो जाता है और आज पूरा हिन्‍दुस्‍तान हर हिन्‍दुस्‍तानी यही कर रहा है। 


प्रधानमंत्री ने कहा कि कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया को अपनी गिरफ्त में ले लिया है और यह ज्ञान, विज्ञान, अमीर और गरीब, मजबूत और लाचार-सब के लिए एक चुनौती के रूप में सामने आया है। उन्‍होंने कहा कि यह वायरस न तो किसी राष्‍ट्र की सीमा में बंधा है और न ही यह कोई क्षेत्र या कोई मौसम देखता है।


श्री मोदी ने कहा कि देशवासी इस बात को समझेंगे कि सरकार को ऐसे निर्णय क्‍यों लेने पड़े जिनसे लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। श्री मोदी ने खासतौर से वंचित समुदाय के लोगों का जिक्र करते हुए कहा कि वे उनकी पीड़ा को समझ सकते हैं।


प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे अनेक योद्धा हैं जो घरों में नहीं, बल्कि घरों के बाहर रहकर कोरोना वायरस का मुकाबला कर रहे हैं। श्री मोदी ने कहा कि अग्रिम मोर्चे पर डटे हमारे ये सैनिक हैं - हमारी नर्स बहनें, डाक्‍टर और पैरा-मेडिकल स्‍टॉफ। उन्‍होंने कहा कि ये वे लोग हैं जो कोरोना को पराजित कर चुके हैं।


इस लड़ाई के अनेकों योद्धा ऐसे हैं जो घरों में नहीं, घरों के बाहर रहकर कोरोना वायरस का मुकाबला कर रहे हैं। जो हमारे फ्रंट लाइन सोल्‍जर्स हैं। खास करके हमारी नर्सेस बहनें हैं। नर्सेस का काम करने वाले भाई हैं, डॉक्‍टर हैं, पैरा मेडिकल स्‍टाफ हैं, ऐसे साथी जो कोरोना को पराजित कर चुके हैं। आज हमें उनसे प्रेरणा लेनी है। 


प्रधानमंत्री ने कोविड-19 के विरूद्ध संघर्ष में डटे कुछ लोगों से फोन पर हुइ बातचीत को साझा करते हुए कहा कि ऐसे लोगों के साथ बातचीत ने उनका उत्‍साह बढ़ाया है और उनसे बात करके स्‍वयं मेरा उत्‍साह भी बढ़ा है।


सबसे पहले उन्‍होंने सूचना प्रौद्योगिकी पेशेवर रामगम्‍पा तेजा से बात की जो कोरोना वायरस संक्रमण से मुक्‍त हो चुके हैं।


परिवार के लिए तो पहले उसके बारे जब पता चला तब तो मैं क्‍वारेंटीन में था। लेकिन क्‍वारेंटीन के बाद भी डॉक्‍टर्स ने बताया था कि और 14 दिन घर पे ही रहना है और अपने रूम में रहना और सेल्‍फ कोर हाउस क्‍वारेंटीन रखने के लिए बोले थे। ठीक होने के बाद भी मैं अपने घर में ही हूं और मेरे रूम में ही रहता हूं ज्‍यादातर मास्‍क लगाके ही रहता हूं दिनभर। जब भी बाहर खाने के लिए कुछ होगा, हैंड वॉशिंग बहुत इंपोर्टेंट है।


श्री मोदी ने आगरा के अशोक कपूर से भी बात की।


हम छह को उन्‍होंने अलग-अलग रूम दिया। अच्‍छे रूम थे। सब कुछ था, तो  सब हम फिर 14 दिन वहां हॉस्पिटल में अकेले रहते थे और डॉक्‍टरों का जहां तक बात है, बहुत सहयोग रहा जी। बड़ा अच्‍छा हमको उन्‍होंने ट्रीट किया। चाहे स्‍टॉफ हो, वो एक्‍चुअली अपनी ड्रेस पहन के आते थे न सब। पता नहीं चलता था कि ये डॉक्‍टर है या वार्ड बॉय है या नर्स है। वो जो कहते थे हम मान लेते थे। फिलहाल हमको किसी तरह की भी एक पर्सेंट भी प्रॉब्‍लम नहीं आई।


देश इस महामारी से चिकित्‍सा के स्‍तर पर इस प्रकार निपट रहा है, इसे समझने के लिए श्री मोदी ने कोरोना वायरस से मुकाबला कर रहे कुछेक डाक्‍टरों से भी बात की। दिल्‍ली के डॉक्‍टर नीतेश गुप्‍ता ने इलाज के लिए अस्‍पताल को सरकार से मिल रही सहायता के लिए श्री मोदी को धन्‍यवाद दिया।


सबका मूड अपबीट है। आपका आशीर्वाद सबके साथ है। आपने दिया हुआ सारा हॉस्पिटल को जो भी आप सपोर्ट कर रहे हैं, जो भी चीज हम मांग रहे हैं। आप सब प्रोवाइड कर रहे हैं, तो हम लोग बिल्‍कुल जैसे आर्मी बार्डर पे खड़ी रहती है, हम लोग बिल्‍कुल वैसे ही लगे हुए हैं और हमारा सिर्फ एक ही कर्तव्‍य है कि पेशेंट  ठीक हो के घर जाये।


पुणे के डॉक्‍टर बोरसे ने कोरोना संक्रमण से उबर रहे रोगियों के साथ अपने अनुभव साझा किए।


सब डॉक्‍टर्स लोग हम हॉस्पिटल में जाके कोरोना पॉजिटिव रोगियों की सेवा कर रहे हैं। मोदी साहब ने हमको फोन करके ये हमारी स्थिति जानने की कोशिश की । उन्‍होंने हमें भरोसा दिलाया, हमारा विश्‍वास बढ़ाया, हमें एनर्जी आई और मोदी साहब ने हमारा धन्‍यवाद किया और ये विश्‍वास दिलाया कि आप डॉक्‍टर लोगों के साथ आपके सहयोग से हमे कोरोना के ऊपर विजयी होंगे।


प्रधानमंत्री ने इस बात पर दुख व्‍यक्‍त किया कि कोरोना वायरस के संदिग्‍ध लोगों या घर में विशेष निगरानी में रखे जा रहे लोगों के प्रति लोग बुरा बर्ताव कर रहे हैं।


मुझे कुछ ऐसी घटनाओं का पता चला है, जिनमें कोरोना वायरस के संदिग्‍ध ऐसे जिन्‍हें होम क्‍वारेंटाइन में रहने को कहा गया है। उनके साथ कुछ लोग बुरा वर्ताव कर रहे हैं। ऐसी बातें सुनकर मुझे अत्‍यंत पीड़ा हुई है। ये बहुत दुर्भाग्‍यपूर्ण है। हमें ये समझना होगा कि मौजूदा हालात में अभी एक-दूसरे से सिर्फ सोशल डिस्‍टेंस बनाकर रखना है न कि इमोशनल या ह्यूमन डिस्‍टेंस। ऐसे लोग कोई अपराधी नहीं हैं। बल्कि वायरस के संभवित पीडि़तभर हैं। इन लोगों ने दूसरों को संक्रमण से बचाने के लिए खुद को अलग किया है और क्‍वारेंटाइन में रहे हैं। 


प्रधानमंत्री ने कहा कि कोरोना वायरस से लड़ने का सबसे कारगर तरीका परस्‍पर सुरक्षित दूरी बनाये रखना ही है। लेकिन हमें यह समझना होगा कि सुरक्षित दूरी का मतलब सामाजिक संपर्क खत्‍म करना नहीं है। श्री मोदी ने कहा कि आने वाले समय में यही हिन्‍दुस्‍तानी अपने देश के विकास के लिए सारी दीवारों को तोड़कर आगे निकलेगा।


आज हर भारतीय अपने जीवन की रक्षा के लिए घर में बंद है। लेकिन आने वाले समय में यही हिन्‍दुस्‍तानी अपने देश के विकास के लिए सारी दीवारों को तोड़कर आगे निकलेगा, देश को आगे ले जायेगा। आप अपने परिवार के साथ घर पर रहिए, सुरक्षित और सावधान रहिए, हमें ये जंग जीतना है जरूर जीतेंगे।  


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कोविड-19 के खिलाफ भारत की लड़ाई के अंतर्गत प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी विभिन्‍न पक्षों से सम्‍पर्क जारी रखे हुए हैं। श्री मोदी हर रोज 200 से अधिक लोगों के साथ बातचीत करते हैं, जिनमें विभिन्‍न राज्‍यों के राज्‍यपाल, मुख्‍यमंत्री और स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री शामिल हैं। वे देश के विभिन्‍न भागों में चिकित्‍सकों, नर्सों, स्‍वास्‍थ्‍य  और सफाई कर्मचारियों के साथ भी फोन पर सम्‍पर्क कर रहे हैं, ताकि राष्‍ट्र और समाज के प्रति उनके कल्‍याणकारी योगदान के लिए आभार व्‍यक्‍त किया जा सकें।


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ईरान से 275 भारतीयों का नया दल आज सुबह जोधपुर पहुंचा, जहां इन लोगों को सैन्‍य आरोग्‍य केन्‍द्र में रखा गया। निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जोधपुर हवाई अड्डे पर सिविल प्रशासन और सेना के चिकित्‍सा दलों ने इन व्‍यक्तियों के स्‍वास्‍थ्‍य की जांच की। बाद में उन्‍हें आइसोलेशन के लिए जोधपुर स्थित सैन्‍य आरोग्‍य केन्‍द्र में भर्ती करा दिया गया।


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भारत में कोविड-19 से 6 और लोगों की मौत के साथ ही इस रोग से मरने वालों की संख्‍या बढ़कर 25 हो गई है। इस महामारी से 48 विदेशियों सहित कुल नौ सौ उनासी लोग पीडि़त हैं। स्‍वास्‍थ्‍य और परिवार कल्‍याण मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार देश में कोरोना वायरस के सक्रिय मामलों की संख्‍या 867 है और 86 लोगों का इलाज किया जा चुका है।


कोविड-19 के सबसे ज्‍यादा 186 मामले महाराष्‍ट्र में सामने आये हैं। केरल में 182 लोग कोरोना पॉजिटिव पाये गये हैं। कोरोना से सबसे ज्‍यादा 6 मौतें भी महाराष्‍ट्र में ही हुई हैं। गुजरात में इससे 4 लोगों की मौत हुई है।


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इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के अध्‍यक्ष संजीव सिंह ने कहा  है कि देश के पास तीन सप्‍ताह की पूर्णबंदी के बाद भी इस्‍तेमाल के लिए पर्याप्‍त मात्रा में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस उपलब्‍ध है। उन्‍होंने कहा कि सभी संयंत्र और आपूर्ति स्‍थल पूरी तरह प्रचालित है।


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राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविन्‍द ने कोविड-19 के संकट से  उबरने में राष्‍ट्र की मदद के लिए प्रधानमंत्री-केयर्स फंड में एक महीने का वेतन दान करने घोषणा की है।


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