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National News

Aug 14, 2019
9:06PM

राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा-- जम्‍मू कश्‍मीर में किए गए परिवर्तनों से लाभ पहुंचेगा। स्‍वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्‍या पर उन्‍होंने प्रगति के बुनियादी सेवाओं के विकास पर जोर‍ दिया

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राष्‍ट्रपति राम नाथ कोविंद ने कहा है कि जम्‍मू कश्‍मीर और लद्दाख में हाल ही में किए परिवर्तनों से इन क्षेत्रों को बहुत लाभ पहुंचेगा। उन्‍होंने कहा कि इससे वहां के लोगों को देश के अन्‍य भागों के नागरिकों की तरह अधिकार, सुविधाएं और विशेषाधिकार मिलेंगे। इन सुविधाओं में शिक्षा के अधिकार  से  संबंधित प्रगतिशील, समतावादी कानून और प्रावधान, सूचना के अधिकार के माध्‍यम से सार्वजिक सूचना, शिक्षा और रोजगार में आरक्षण और पारंपरिक रूप से वंचित समुदाय के लिए सुविधायें, और एक बार में तीन तलाक जैसी असमान कुरीतियों की समाप्ति से बेटियों के लिये न्याय शामिल हैं। 
73-वें स्‍वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्‍या पर राष्‍ट्र को संबोधन में राष्‍ट्रपति ने कहा कि भारत एक बहुत ही विशेष मोड़ पर अपनी आजादी के 72 वर्ष पूरे कर रहा है। श्री कोविंद ने कहा कि देश को आजादी दिलाने वाली महान पीढ़ी ने केवल राजीनतिक अधिकार का स्‍थानान्‍तरण नहीं सोचा था, बल्कि उन्‍होंने इसे राष्‍ट्र निर्माण और राष्‍ट्रीय एकता की दूरगामी और  व्यापक प्रक्रिया की ओर  बढ़ता कदम माना था।

श्री कोविंद ने हाल में संपन्‍न संसदीय सत्र पर प्रसन्नता व्‍यक्‍त की। लोक सभा और राज्‍य सभा दोनों ही सदनों में लम्‍बी निर्णायक बैठकें हुईं। उन्‍होंने कहा कि कई महत्वपूर्ण विधेयक पारित किये गये और सभी दलों की ओर से सहयोग मिला तथा मुद्दों पर सकारात्‍मक चर्चा की गयी। इन चर्चाओं का उद्देश्‍य प्रत्‍येक व्‍यक्ति और प्रत्‍येक परिवार तथा समाज के जीवन को बेहतर बनाना था।

राष्‍ट्रपति ने स्पष्ट किया कि भारत कभी भी आलोचनात्मक समाज नहीं रहा। उन्‍होंने कहा कि भारत हमेशा जीओ और जीने दो के सिद्धांत को मानता रहा है जहां लोग क्षेत्र, भाषा अथवा आस्तिकता या नास्तिकता के भेदभाव से ऊपर उठ कर एक दूसरे की पहचान का सम्मान करते रहें हैं। उन्‍होंने यह भी कहा कि भारत का इतिहास, नियति, धरोहर और उसका भविष्‍य सभी में सह-अस्तित्‍व, सुलह-सफाई और मेलजोल का आधार है।

देश के युवाओं के बारे में श्री कोविंद ने कहा कि हम  युवाओं और भावी पीढ़ियों को जो सबसे बड़ा उपहार दे सकते हैं वह है -उन्‍हें प्रोत्‍साहित करना तथा उन्हें शिक्षा की कक्षाओं में जिज्ञासु बनाना।

उन्‍होंने कहा कि सरकार द्वारा उपलब्‍ध वातावरण और सुविधाओं से लोग बहुत कुछ प्राप्‍त कर सकते हैं। उन्‍होंने कहा कि सरकार पारदर्शी और समावेशी बैंकिंग प्रणाली, ऑन-लाइन सुविधाजनक कर प्रणाली तथा वैध उद्यमियों के लिए पूंजी की आसान उपलब्‍धता पर आधारित वित्‍तीय ढांचे का निर्माण कर सकती है। राष्‍ट्रपति ने सरकार द्वारा बेहद गरीबों के लिए आवास, प्रत्‍येक घर में बिजली, शौचालय और पानी की व्‍यवस्‍था किए जाने के कार्यो का भी उल्‍लेख किया।

श्री कोविंद ने समाज के लिए इन आधारभूत सुविधाओं का सभी के लिए प्रयोग करने और उन्‍हें अधिक प्रभावी बनाने के महत्‍व पर भी बल दिया। इस बारे में उदाहरण देते हुए उन्‍होंने कहा कि ग्रामीण सड़कें और बेहतर कनेक्टिविटी तभी सार्थक हो सकती हैं अगर किसान बड़े बाजारों तक पहुंचने और अपने उत्‍पाद का लाभकारी मूल्‍य प्राप्‍त करने के लिए इनका इस्‍तेमाल करें। उन्‍होंने यह भी कहा कि राजकोषीय सुधारों और सरल विनियम तभी सार्थक हो सकते हैं अगर उद्यमी इसका इस्‍तेमाल करके ईमानदारी और नवाचार पर आधारित उद्यम बनाएं और टिकाऊ रोजगार का सृजन करें। उन्‍होंने इस बात पर जोर दिया कि इन आधारभूत ढांचों से लाभान्वित होना और इन्‍हें सुरक्षित रखना, कड़ी मेहनत से प्राप्‍त आजादी का एक दूसरा पहलू होगा।

राष्‍ट्रपति ने कहा कि 2 अक्‍टूबर को देश राष्‍ट्रपिता महात्‍मा गांधी की 150-वीं जयंती मनायेगा। श्री कोविंद ने कहा कि आज का भारत महात्‍मा गांधी के समय के भारत से बहुत अलग है।  लेकिन अब भी गांधी जी प्रासंगिक हैं।

राष्‍ट्रपति ने कहा कि इस वर्ष सिख धर्म के संस्‍थापक गुरू नानक देव जी की 550-वीं जयंती भी मनाई जायेगी। गुरू नानक देव जी का सम्‍मान और उनकी शिक्षा, सिख भाइयों और बहनों के अलावा देश के अन्‍य नागरिकों के लिए भी प्रासंगिक है।

श्री कोविंद ने तमिल भाषा के कवि सुब्रह्मण्‍यम भारती के प्रेरणात्‍मक पद्य से संबोधन का समापन किया। इस महान कवि की कविताओं ने देश की स्‍वतंत्रता संग्राम और व्‍यापक लक्ष्‍य को वाणी दी थी।

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